
अरेराज, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी)
अनुमंडलीय अस्पताल अरेराज के आसपास ऐसे दर्जनों क्लिनिक चल रहे हैं जिनके डॉक्टर के पास ना तो कोई डिग्री है, ना क्लिनिक मे कोई व्यवस्था है बस भगवान भरोसे मरीज का इलाज और ऑपरेशन हो रहा है, हरेक दो-चार महीने में एक दो मरीजों की मौत होती है और फिर शुरू होता है विभागीय जांच, जांच के नाम पर एक टीम तैयार की जाती है, और टीम के द्वारा जाँच करके एक दो हॉस्पिटल या पैथोलॉजी को सील किया जाता है, फिर कुछ दिनों बाद शुरू होता है वही खेल वही डॉक्टर एक नया क्लिनिक एक नया नाम के साथ खोलते हैं और दूर दराज गांवों से आशा कार्यकर्ता एवं उनके दलाल मरीजों को बहला फुसलाकर उनके क्लीनिक में लेकर आते हैं जहां बिना किसी व्यवस्था के उनका इलाज के नाम पर शोषण किया जाता है इलाज से पहले जांच के नाम पर उनका आर्थिक दोहन किया जाता है फिर उन्हें बिना जरूरत महंगी दवाइयां लिख दी जाती है जो डॉक्टर के मनपसंद के दवा दुकानदार के यहां से खरीदनी होती है। नाम नहीं छापने के शर्त पर एक मरीज के परिजन के द्वारा बताया गया कि अस्पताल परिसर में जो ब्रांडेड गैस की दवा पैंटोप्राजोल डोमपेरीडोन डीएसआर 140 रुपए का एक पत्ता मिलता है वही इन डॉक्टरों के द्वारा लिखी गई पूजा पर सेम कंपोजिसन की दवा 300 से 400 रुपये के बीच मिलती है। जिसमें इन कथित डॉक्टर के दलालों का कमीशन और आशा कार्यकर्ता का कमीशन भी जुड़ा हुआ रहता है। बता दें कि अभी 1 सप्ताह पहले हॉस्पिटल रोड स्थित महादेव फार्मा नाम के दवा दुकान में चल रहे अवैध नर्सिंग होम में एक महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी और यहां पर जांच टीम बनाकर रोज छापेमारी चालू है, जिससे अवैध नर्सिंग होम चलाने वाले बिना डिग्री के डॉक्टर क्लीनिक छोड़कर फरार हैं।





